राज्यपाल / राष्ट्रपति शासन क्या है और इसके दौरान क्या होता है?

राज्यपाल के शासन के दौरान क्या होता है?

भारत के किसी भी अन्य राज्य में संवैधानिक मशीनरी की विफलता की स्थिति में, राष्ट्रपति शासन को संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत लगाया गया है। लेकिन जम्मू-कश्मीर के मामले में (वर्ष 2018) , राज्य संविधान की धारा 92 के प्रावधान के तहत छह महीने की अवधि के लिए राज्यपाल का नियम लगाया गया है, और इस प्रभाव की घोषणा केवल भारत के राष्ट्रपति की सहमति के बाद राज्यपाल द्वारा जारी की जाती है।

राज्य विधानसभा या तो निलंबित या भंग रखी जाती है। यदि इस छह महीने की अवधि समाप्त होने से पहले संवैधानिक मशीनरी को पुनर्स्थापित करना संभव नहीं हो पाता है, तो संविधान के अनुच्छेद 356 का प्रावधान बढ़ाया गया है और राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया है।

राज्य विधानसभा या तो निलंबित एनीमेशन या भंग में रखा जाता है। यदि इस छह महीने की अवधि समाप्त होने से पहले संवैधानिक मशीनरी को पुनर्स्थापित करना संभव नहीं है, तो संविधान के अनुच्छेद 356 का प्रावधान बढ़ाया जा सकता है और राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया जाता है।

राष्ट्रपति शासन (या केन्द्रीय शासन) भारत में शासन के संदर्भ में उस समय प्रयोग किया जाने वाला एक पारिभाषिक शब्द है, जब किसी राज्य सरकार को भंग या निलंबित कर दिया जाता है और राज्य प्रत्यक्ष संघीय शासन के अधीन आ जाता है। भारत के संविधान का अनुच्छेद 356, केंद्र की संघीय सरकार को राज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलता या संविधान के स्पष्ट उल्लंघन की दशा में उस राज्य सरकार को बर्खास्त कर उस राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने का अधिकार देता है। राष्ट्रपति शासन उस स्थिति में भी लागू होता है, जब राज्य विधानसभा में किसी भी दल या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं हो।

अनुच्छेद-356

अनुच्छेद 356, केंद्र सरकार को किसी राज्य सरकार को बर्खास्त करने और राष्ट्रपति शासन लगाने की अनुमति उस अवस्था में देता है, जब राज्य का संवैधानिक तंत्र पूरी तरह विफल हो गया हो। यह अनुच्छेद एक साधन है जो केंद्र सरकार को किसी नागरिक अशांति (जैसे कि दंगे जिनसे निपटने में राज्य सरकार विफल रही हो) की दशा में किसी राज्य सरकार पर अपना अधिकार स्थापित करने में सक्षम बनाता है (ताकि वो नागरिक अशांति के कारणों का निवारण कर सके)। 1950 में भारतीय संविधान के लागू होने के बाद से केन्द्र सरकार द्वारा इसका प्रयोग 100 से भी अधिक बार किया गया है।

अनुच्छेद-355

अनुच्छेद 355 केंद्र सरकार अधिकृत करता है ताकि वो किसी बाहरी आक्रमण या आंतरिक अशांति की दशा में राज्य की सुरक्षा सुनिश्चित कर सके और प्रत्येक राज्य का शासन संविधान के प्रावधानों के अनुसार चलता रहे। इस अनुच्छेद का इस्तेमाल तब किया गया जब भाजपा शासित राज्यों में गिरिजाघरों पर हमले हो रहे थे। तब के संसदीय कार्य मंत्री वायलार रवि ने अनुच्छेद 355 में संशोधन कर, राज्य के कुछ भागों या राज्य के कुछ खास क्षेत्रों को केंद्र द्वारा नियंत्रित करने का सुझाव दिया था।


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