सिविल सेवा परीक्षा - राष्ट्रीयता एवं आयु सीमा

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सिविल सेवा परीक्षा का प्रारूप

राष्ट्रीयता

(1) भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय पुलिस सेवा का उम्मीदवार भारत का नागरिक अवश्य हो।
(2) अन्य सेवाओं के उम्मीदवारों को या तो
(क) भारत का नागरिक होना चाहिए, या
(ख) नेपाल की प्रजा, या
(ग) भूटान की प्रजा, या
(घ) ऐसा तिब्बती शरणार्थी जो भारत में स्थायी रूप से रहने के इरादे से पहली जनवरी, 1962 से पहले भारत आ गया हो, या
(ङ) कोई भारतीय मूल का व्यक्ति जो भारत में स्थायी रूप से रहने के इरादे से पाकिस्तान, बर्मा, श्रीलंका, पूर्वी अफ्रीकी देशों नाइजीरिया, युगांडा, संयुक्त गणराज्य तंजानिया, जाम्बिया, मालावी, जैरे, इथियोपिया तथा वियतनाम से प्रवजन कर आया हो।
परन्तु (ख), (ग), (घ) और (ङ) वर्गों के अंतर्गत आने वाले उम्मीदवार के पास भारत सरकार द्वारा जारी किया गया पात्रता (एलिजीबिलिटी) प्रमाण-पत्र होना चाहिए।
एक शर्त यह भी है कि उपर्युक्त (ख), (ग), (घ) और (ड़) वर्गों के उम्मीदवार भारतीय विदेश सेवा में नियुक्ति के पात्र नहीं होंगे। ऐसे उम्मीदवार को भी उक्त परीक्षा में प्रवेश दिया जा सकता है जिसके बारे में पात्रता प्रमाण-पत्र प्राप्त करना आवश्यक हो, किंतु भारत सरकार द्वारा उसके संबंध में पात्रता प्रमाण-पत्र जारी किए जाने के बाद ही उसको नियुक्ति प्रस्ताव भेजा जा सकता है।

आयु सीमा

 (क) उम्मीदवार की आयु संबंधित वर्ष के 1 अगस्त को पूरे 21 वर्ष से 32 वर्ष के बीच होनी चाहिए, किन्तु 32 वर्ष की नहीं होनी चाहिए। विभिन्न सेवाओं के संदर्भ में संबंधित नियमों/विनियमों में समरूप परिवर्तन हेतु आवश्यक कार्रवाई अलग से की जा रही है।

(ख) ऊपर बताई गई अधिकतम आयु-सीमा में निम्नलिखित मामलों में छूट दी जाएगी:
(i) यदि उम्मीदवार किसी अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का हो तो अधिक से अधिक 5 वर्ष।
(ii) अन्य पिछड़ी श्रेणियों के उन उम्मीदवारों के मामले में अधिकतम तीन वर्ष तक जो ऐसे उम्मीदवारों के लिए लागू आरक्षण को पाने के पात्र हों।
(iii)ऐसे उम्मीदवारों के मामले में, जिन्होंने 01 जनवरी, 1980 से 31 दिसम्बर, 1989 तक की अवधि के दौरान साधारणतया जम्मू और कश्मीर राज्य में अधिवास किया हो, अधिकतम 5 वर्ष तक।
(iv)किसी दूसरे देश के साथ संघर्ष में या किसी अशांतिग्रस्त क्षेत्र में फौजी कार्यवाही के दौरान विकलांग होने के फलस्वरूप सेवा से निर्मुक्त किए गए रक्षा कार्मिकों को अधिक-से-अधिक 3 वर्ष।
(v) जिन भूतपूर्व सैनिकों (कमीशन प्राप्त अधिकारियों तथा आपातकालीन कमीशन प्राप्त अधिकारियों/अल्पकालिक सेवा कमीशन प्राप्त अधिकारियों सहित) ने परीक्षा के संबंधित वर्ष में 1 अगस्त को कम-से-कम 5 वर्ष की सैनिक सेवा की हो और जो ;पद्ध कदाचार या अक्षमता के आधार पर बर्खास्त न होकर अन्य कारणों से कार्यकाल के समापन पर कार्यमुक्त हुए हैं, (इनमंे वे भी सम्मिलित हैं जिनका कार्यकाल परीक्षा के वर्ष 1 अगस्त से 1 वर्ष के अंतर्गत पूरा होना है), या ;पपद्ध सैनिक सेवा से हुई शारीरिक अपंगता, या ;पपपद्ध अक्षमता के कारण कार्यमुक्त हुए हैं, उनके मामले में अधिक-से-अधिक 5 वर्ष।
(vi) आपातकालीन कमीशन प्राप्त अधिकारियों/अल्पकालीन सेवा के कमीशन प्राप्त अधिकारियों के उन मामलों में जिन्होंने परीक्षा के वर्ष 1 अगस्त को सैनिक सेवा के 5 वर्ष की सेवा की प्रारंभिक अवधि पूरी कर ली है और जिनका कार्यकाल 5 वर्ष से आगे भी बढ़ाया गया है तथा जिनके मामले में रक्षा मंत्रालय एक प्रमाण-पत्र जारी करता है कि वे सिविल रोजगार के लिए आवेदन कर सकते हैं और चयन होने पर नियुक्ति प्रस्ताव प्राप्त करने की तारीख से तीन माह की नोटिस पर उन्हें कार्यभार से मुक्त किया जाएगा। अधिकतम 5 वर्ष।
(vii) नेत्रहीन, मूक-बधिर शारीरिक रूप से विकलांग व्यक्तियों के मामले में अधिकतम 10 वर्ष तक।

नोट-I: अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति व अन्य पिछड़े वर्गों से संबंधित वे उम्मीदवार, जो उपर्युक्त पैरा (ख) के किन्हीं अन्य खंडों अर्थात्, जो भूतपूर्व सैनिकों, जम्मू तथा कश्मीर राज्य में अधिवास करने वाले व्यक्तियों की श्रेणी के अंतर्गत आते हैं, दोनों श्रेणियों के अंतर्गत दी जाने वाली संचयी आयु सीमा-छूट प्राप्त करने के पात्र होंगे।

नोट-II: भूतपूर्व सैनिक शब्द उन व्यक्तियों पर लागू होगा जिन्हें समय-समय पर यथासंशोधित भूतपूर्व सैनिक (सिविल सेवा और पद में पुनः रोजगार) नियम, 1979 के अधीन भूतपूर्व सैनिक के रूप में परिभाषित किया जाता है।

नोट-III: भूतपूर्व सैनिकों (कमीशन प्राप्त अधिकारियों तथा आपातकालीन कमीशन प्राप्त अधिकारियों/अल्पकालिक सेवा कमीशन प्राप्त अधिकारियों/आपातकालीन सेवा कमीशन प्राप्त अधिकारियों सहित) जिन्हें उनकी प्रार्थना पर मुक्त किया गया हो, वे उपर्युक्त पैरा (ii) (ख) (v) तथा (vi) के अधीन आयु सीमा में छूट के पात्र नहीं हैं।

नोट-IV: उपर्युक्त पैरा (ii) (ख) (vii) आयु में छूट के बावजूद शारीरिक रूप से विकलांग उम्मीदवार की नियुक्ति हेतु पात्रता पर तभी विचार किया जा सकता है, जब वह (सरकार या नियोक्ता प्राधिकारी, जैसा भी मामला हो, द्वारा निर्धारित शारीरिक परीक्षण के बाद) सरकार द्वारा शारीरिक रूप से विकलांग उम्मीदवारों को आवंटित संबंधित सेवाओं/पदों के लिए निर्धारित शारीरिक एवं चिकित्सा मानकों की अपेक्षाओं को पूरा करता हो।

ऊपर की व्यवस्था को छोड़कर निर्धारित आयु-सीमा में किसी भी हाल में छूट नहीं दी जाती है। आयोग जन्म की वह तारीख स्वीकार करता है जो मैट्रिकुलेशन या माध्यमिक विद्यालय छोड़ने के प्रमाण-पत्र या किसी भारतीय विश्वविद्यालय द्वारा मैट्रिकुलेशन के समकक्ष माने गए प्रमाण-पत्र या किसी विश्वविद्यालय द्वारा अनुरक्षित मैट्रिकुलेटों के रजिस्टर में दर्ज की गई हो और वह उद्धरण विश्वविद्यालय के समुचित प्राधिकारी द्वारा प्रमाणित हो यथा उच्चतर माध्यमिक परीक्षा या उसकी समकक्ष परीक्षा प्रमाण-पत्र में दर्ज हो।

ये प्रमाण-पत्र सिविल सेवा (प्रधान) परीक्षा के लिए आवेदन करते समय ही प्रस्तुत करने होते हैं। आयु के संबंध में कोई अन्य दस्तावेज जैसे जन्म कंुडली, शपथ पत्र, नगर निगम से और सेवा अभिलेख से प्राप्त जन्म संबंधी उद्धरण तथा अन्य ऐसे ही प्रमाण स्वीकार नहीं किए जाते हैं। अनुदेशों के इस भाग में आये 'मैट्रिकुलेशन/उच्चतर माध्यमिक परीक्षा प्रमाण-पत्र' वाक्यांश के अंतर्गत उपर्युक्त वैकल्पिक प्रमाण-पत्र सम्मिलित हैं।

टिप्पणी-I: उम्मीदवारों को ध्यान रखना चाहिए कि आयोग जन्म की उसी तारीख को स्वीकार करेगा जो कि आवेदन-पत्र प्रस्तुत करने की तारीख को मैट्रिकुलेशन/उच्चतर माध्यमिक परीक्षा प्रमाण-पत्र या समकक्ष परीक्षा के प्रमाण-पत्र मंे दर्ज है और इसके बाद उसमें परिवर्तन के किसी अनुरोध पर न तो विचार किया जाएगा, न उसे स्वीकार किया जाएगा।

टिप्पणी-II: उम्मीदवारों को ध्यान रखना चाहिए कि उनके द्वारा परीक्षा में प्रवेश के लिए जन्म की तारीख एक बार लिख भेजने और आयोग द्वारा उसके स्वीकृत हो जाने के बाद, बाद में या किसी परीक्षा में उसमें परिवर्तन करने की अनुमति नहीं दी जाती है।

टिप्पणी-III: उम्मीदवारों को प्रारंभिक परीक्षा के लिए आनलाइन आवेदन प्रपत्र में जन्म तिथि भरते समय उचित सावधानी बरतनी चाहिए। यदि बाद में किसी अवस्था में, जांच के दौरान उनके द्वारा भरी गई जन्म तिथि की उनके मैट्रिक या समकक्ष परीक्षा के प्रमाण-पत्र में दी गई जन्म तिथि से कोई भिन्नता पाई गई तो आयोग द्वारा उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।


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